Home आध्यात्मिक तीर्थ यात्रा Supreme Court permited for Jagannath Temple Rath Yatra 2020

Supreme Court permited for Jagannath Temple Rath Yatra 2020


– मंदिर प्रबंधन समिति, राज्य सरकार और केंद्र सरकार आपस में तालमेल कर रथयात्रा का आयोजन करवाएंगे…
– उच्चतम न्यायालय (SC) ने दी इजाजत…

विश्व प्रसिद्ध पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दे दी है। कोरोना को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ रथयात्रा की इजाजत दी। कोर्ट ने कहा कि इससे पहले कॉलरा और प्लेग के दौरान भी रथ यात्रा सीमित नियमों और श्रद्धालुओं के बीच हुई थी, चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट केवल पुरी में यात्रा के बारे में विचार कर रहा है और ओडिशा में कहीं अन्‍य जगह पर नहीं।

अब इस रथयात्रा का मंदिर प्रबंधन समिति, राज्य सरकार और केंद्र सरकार आपस में तालमेल कर आयोजन करवाएंगे। कोरोना से बचाव की गाइडलाइन का पालन करते हुए ऐसा किया जाएगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि पुरी में कोरोना के केसों की संख्‍या में बढ़ोतरी हो तो राज्‍य सरकार के पास रथ यात्रा रोकने की आजादी होगी।

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जगन्नाथ से जुड़ा है अंग्रेजी शब्द ‘जगरनॉट’…
वहीं इससे पहले गुरुवार को प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे ने कहा था कि मुझे हाल ही में पता चला कि अंग्रेजी शब्द जगरनॉट (JUGGERNAUT) भगवान जगन्नाथ से संबंधित है और इसका अर्थ होता है नहीं रोकी जा सकने वाली शक्ति।’प्रधान न्यायाशीध बोबडे ने इसी माह ओडिशा के पुरी में 23 जून को होने वाली जगन्नाथ रथयात्रा को कोरोना महामारी के कारण स्थगित करने का फैसला सुनाते हुए यह बात कही।

दरअसल इससे पहले 18 जून को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा था, ”यदि हमने इस साल हमने रथ यात्रा की इजाजत दी तो भगवान जगन्नाथ हमें माफ नहीं करेंगे। महामारी के दौरान इतना बड़ा समागम नहीं हो सकता है।” बेंच ने ओडिशा सरकार से यह भी कहा कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए राज्य में कहीं भी यात्रा, तीर्थ या इससे जुड़े गतिविधियों की इजाजत ना दें।

लेकिन कोर्ट के फैसले को लेकर कई पुनर्विचार याचिकाएं लगाई गई थी। जिसपर आज सुनवाई करते हुए कोर्ट ने अपने पुराने फैसले को पलटते हुए जगन्नाथ रथ यात्रा को कुछ शर्तों के साथ निकालने की अनुमति दे दी है।

वहीं अब रथयात्रा को हरी झंडी देते हुए कोर्ट ने ये भी कहा कि 12 दिनों की यात्रा के दौरान 10 लाख श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। कोरोना को देखते हुए ये घातक हो सकता है क्‍योंकि इतनी बड़ी संख्‍या में होने वाले आवागमन को ट्रैक करना मुश्किल होगा। 18-19 सदी में यात्रा के दौरान कॉलरा जैसी बीमारी फैली थी।

कोर्ट में ये हुई चर्चा…
इससे पहले सॉलिसिटर जनरल ने कहा क‍ि शंकराचार्य, पुरी के गजपति और जगन्नाथ मंदिर समिति से सलाह कर यात्रा की इजाजत दी जा सकती है। केंद्र सरकार भी यही चाहती है कि कम से कम आवश्यक लोगों के ज़रिए यात्रा की रस्म निभाई जा सकती है।

इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि शंकराचार्य को क्यों शामिल किया जा रहा है? पहले से ट्रस्ट और मन्दिर कमेटी ही आयोजित करती है। शंकराचार्य को सरकार क्यों शामिल कर रही है?

केंद्र सरकार के वकील (तुषार मेहता) – नहीं, हम तो मशविरे की बात कर रहे हैं। वो सर्वोच्च धार्मिक गुरु हैं। वकील हरीश साल्‍वे ने कहा कि कर्फ्यू लगा दिया जाए। रथ को सेवायत या पुलिस कर्मी खींचें जो कोविड निगेटिव हों।

चीफ जस्टिस (CJI)- हमें पता है। ये सब माइक्रो मैनेजमेंट राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। केंद्र की गाइडलाइन के प्रावधानों का पालन करते हुए जनस्वास्थ्य के हित मुताबिक व्यवस्था हो।

सॉलिसिटर जनरल – गाइडलाइन के मुताबिक व्यवस्था होगी।

सीजेआई – आप कौन सी गाइडलाइन की बात कर रहे हैं?

मेहता – जनता की सेहत को लेकर गाइडलाइन का पालन होगा।

ओडिशा विकास परिषद के वकील (रंजीत कुमार)- 10 से 12 दिन की यात्रा होती है. इस दौरान अगर कोई समस्‍या होती है तो वैकल्पिक इंतजाम जरूरी है। मंदिर में 2.5 हजार पंडे हैं। सबको शामिल न होने दिया जाए।

CJI- हम माइक्रो मैनेजमेंट नहीं करेंगे। स्वास्थ्य गाइलाइन के मुताबिक सरकार कदम उठाए. हम (यात्रा कैसे हो इस पर) कोई विस्तृत आदेश नहीं देंगे।

ओडिशा सरकार के वकील ने कहा कि हम मंदिर कमेटी और केंद्र के साथ समन्वय स्थापित कर यात्रा आयोजित करवाएंगे।श्रद्धालुओं की एक संस्था के वकील ने कहा कि यात्रा का सीधा प्रसारण हो तो हमें कोई समस्या नहीं है। इस तरह पूजा भी हो जाएगी और लोगों का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहेगा।

बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस साल पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को लेकर अनिश्चितता के बीच सोमवार को जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव से बात की। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समीर मोहंती ने बताया कि शाह ने वर्ष 1736 से अनवरत चल रही रथ यात्रा के साथ जुड़ी परंपरा पर चर्चा की।

उन्होंने एक ट्वीट में कहा, भगवान जगन्नाथ के अनन्य भक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गजपति महाराज से बात की। मोहंती ने बताया, मुझे आशा है कि उच्चतम न्यायालय इस साल पुरी में रथ यात्रा आयोजित करने की मंजूरी दे देगा।

Jagannath Temple Rath Yatra 2020 is ready to go

उन्होंने कहा कि शाह ने उत्सव के साथ जुड़ी धार्मिक भावनाओं को लेकर भी देव के साथ बातचीत की। पुरी की रथ यात्रा में हर साल दुनियाभर से लाखों श्रद्धालु आते हैं।

रथयात्रा में शमिल होने की महिमा…
रथयात्रा एक ऐसा पर्व है जिसमें भगवान जगन्नाथ चलकर अपने भक्‍तों के बीच आते हैं और उनके दु:ख-सु:ख में सहभागी होते हैं। इसका महत्‍व शास्त्रों और पुराणों में भी बताया गया है। स्‍कंद पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि जो भी व्‍यक्ति रथयात्रा में शामिल होकर गुंडीचा नगर तक जाता है।

वह जीवन-मरण के चक्र से मुक्‍त हो जाता है। वहीं जो भक्‍त श्रीजगन्नाथजी का दर्शन करते हुए, प्रणाम करते हुए मार्ग के धूल-कीचड़ से होते हुए जाते हैं वे सीधे भगवान श्रीविष्णु के उत्तम धाम को जाते हैं। इसके अलावा जो गुंडिचा मंडप में रथ पर विराजमान श्रीकृष्ण, बलराम और सुभद्रा देवी के दक्षिण दिशा को आते हुए दर्शन करते हैं वे मोक्ष को प्राप्त होते हैं।

जगन्नाथ रथ यात्रा का महत्व-
हिन्दू धर्म में जगन्नाथ रथ यात्रा का एक बहुत बड़ा महत्व हैं। मान्यताओं के अनुसार रथ यात्रा को निकालकर भगवान जगन्नाथ को प्रसिद्ध गुंडिचा माता मंदिर पहुंचाया जाता हैं। यहां भगवान जगन्नाथ आराम करते हैं।

गुंडिचा माता मंदिर में भारी तैयारियां की जाती हैं और मंदिर की सफाई के लिये इंद्रद्युमन सरोवर से जल लाया जाता हैं। यात्रा का सबसे बड़ा महत्व यही है कि यह पूरे भारत में एक पर्व की तरह मनाया जाता हैं। चार धाम में से एक धाम जगन्नाथ मंदिर को माना गया हैं। इसलिए जीवन में एक बार इस यात्रा में शामिल होने का शास्त्रों में भी उल्लेख हैं।

सौ यज्ञ बराबर मिलता है पुण्य-
भगवान जगन्नाथ को श्रीकृष्ण का अवतार माना गया हैं। जिनकी महिमा का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में भी किया गया हैं। ऐसी मान्यता हैं कि जगन्नाथ रथयात्रा में भगवान श्रीकृष्ण और उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा का रथ होता हैं। जो इस रथयात्रा में शामिल होकर रथ को खींचते हैं उन्हें सौ यज्ञ के बराबर पुण्य लाभ मिलता हैं।

रथयात्रा के दौरान लाखों की संख्या में लोग शामिल होते हैं और रथ को खींचने के लिए श्रद्धालुओं का भारी तांता लगता हैं। जगन्नाथ यात्रा हिन्दू पंचाग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती हैं।


















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